गोरखपुर:- उत्तर प्रदेश में ग्राम पंचायत चुनाव 2020 की तैयारियां जोरों शोरों से चल रही हैं। उत्तर प्रदेश के मुख्यमंत्री CM योगी की भी मंशा है कि पंचायत Election 31 मार्च से पहले हो जाएं। CM योगी के आदेश को पंचायत विभाग और election committee के अफसर गंभीरता से ले रहे हैं। पंचायत Election की सरगर्मियां तेज हो गईं हैं।
सरकारी machinery voter list, परिसीमन और आरक्षण सूची बनाने में जुटी हैै। उत्तर प्रदेश ग्रामीण पंचायत इलेक्शन लड़ने वाले पुराने प्रधान और नए प्रधान पद के उम्मीदवार के लिए कुछ जरूरी जानकारी हैं, जिनके बारे में पता होना आवश्यक है। तो अगर लड़ना चाहते हैं ग्राम प्रधान का इलेक्शन? जान लीजिए क्या-क्या है जरूरी।
पूरे उत्तर प्रदेश में हर चौपाल पर आज कल ग्राम प्रधान, बीडीसी, जिला पंचायत सदस्य की ही चर्चा हो रही है। जानिए ग्राम प्रधान का चुनाव लड़ना चाहते हैं तो क्या-क्या जरूरी हैं-
गांव में हर 5 साल के बाद ग्राम प्रधान का इलेक्शन कराया जाता है। निर्वाचन आयोग इसके लिए तैयारी करवाता है। यह इलेक्शन भी ठीक उसी तरह से होता है जैसे लोकसभा या विधानसभा का इलेक्शन। इसमें भी सबसे पहले अधिसूचना जारी की जाती है, अधिसूचना जारी होते ही आचार संहिता भी लागू किया जाता है। और अब जो व्यक्ति ग्राम प्रधान या सदस्य के पद पर चुनाव लड़ना चाहता है, उसको एक निर्धारित समय अवधि के अंदर पर्चा दाखिल या आवेदन पत्र को जिले के निर्वाचन अधिकारी के समक्ष प्रस्तुत करना होता है। इसके बाद निर्वाचन कार्यालय के द्वारा प्रत्येक आवेदनकर्ता को एक चुनाव चिन्ह का सिंबल प्रदान किया जाता है। इस समय अब सभी प्रत्याशी के द्वारा चुनाव प्रचार किया जा रहा है, यह चुनाव प्रचार निर्वाचन आयोग के निर्देशानुसार किया जाता है। इसके बाद निर्धारित तिथि को मतदान कराया जाता है, मतदान के पश्चात मतगणना की जाती है, जिस प्रत्याशी को अधिक मत प्राप्त होते है, उसे ग्राम प्रधान पद पर निर्वाचित किया जाता है। निर्वाचित सदस्य को निर्वाचन अधिकारी के द्वारा प्रमाण पत्र प्रदान किया जाता है। और वही ग्राम प्रधान होता है और उसे गांव का मुखिया भी कहा जाता है जिससे वह गांव को विकास की ओर बढ़ा सकें।

0 Comments